गणपति बप्पा की विदाई में उमड़ी मुंबई, पांचवें दिन 32,345 मूर्तियों का विसर्जन; भक्तों में दिखा जबरदस्त उत्साह

मुंबई, महाराष्ट्र | 19 सितंबर 2026

मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान गणपति बप्पा की विदाई का सिलसिला लगातार जारी है। 18 सितंबर 2026 को गणेशोत्सव के पांचवें दिन मुंबई और उपनगरों में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और धार्मिक परंपराओं के साथ बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया। आधी रात तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, शहर में कुल 32,345 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

विसर्जन के दौरान मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में भक्तों की भीड़ नजर आई। कहीं ढोल-नगाड़ों के साथ बप्पा को विदाई दी गई तो कहीं श्रद्धालु भक्ति गीतों और जयकारों के बीच प्रतिमा लेकर विसर्जन स्थल तक पहुंचे। पांचवें दिन भी मुंबई में गणपति उत्सव का उत्साह देखने को मिला।

31 हजार से ज्यादा घरेलू गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन

पांचवें दिन विसर्जित की गई कुल प्रतिमाओं में सबसे बड़ी संख्या घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं की रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कुल 32,345 प्रतिमाओं में 31,647 घरेलू गणेश प्रतिमाएं शामिल थीं।

इसके अलावा सार्वजनिक गणेश मंडलों की 662 प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया गया। साथ ही 36 हरतालिका प्रतिमाओं का विसर्जन भी हुआ।

इससे साफ है कि गणेशोत्सव के पांचवें दिन भी मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में स्थापित बप्पा की प्रतिमाओं को श्रद्धापूर्वक विदाई देने का सिलसिला जारी रहा।

ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच बप्पा को विदाई

मुंबई में गणेश विसर्जन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि शहर की एक बड़ी सांस्कृतिक परंपरा भी है। पांचवें दिन भी अलग-अलग इलाकों से श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं को लेकर विसर्जन स्थलों तक पहुंचे।

भक्तों ने ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई दी। कई स्थानों पर ढोल-ताशों की गूंज के बीच विसर्जन जुलूस निकले और श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते हुए गणपति प्रतिमाओं को विदाई दी।

गणेशोत्सव के अलग-अलग दिनों में श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपराओं के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं। इसलिए चतुर्थी के बाद डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें दिन और अनंत चतुर्दशी जैसे अलग-अलग अवसरों पर विसर्जन होता है।

विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों की भी व्यवस्था

मुंबई में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों के साथ-साथ कृत्रिम विसर्जन तालाबों की भी व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य छोटे आकार की प्रतिमाओं के विसर्जन को व्यवस्थित तरीके से कराना और प्राकृतिक जलस्रोतों पर दबाव कम करना है।

नगर निकाय की ओर से शहर के अलग-अलग हिस्सों में कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं। पांचवें दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इन स्थानों का इस्तेमाल किया। छह फीट से अधिक ऊंचाई वाली प्रतिमाओं के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन की व्यवस्था की गई।

विसर्जन के दौरान नहीं हुई कोई अप्रिय घटना

पांचवें दिन इतने बड़े स्तर पर विसर्जन के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर स्थिति नियंत्रण में रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विसर्जन प्रक्रिया के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए विसर्जन स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। भीड़ को नियंत्रित करने और विसर्जन प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए प्रशासन तथा स्थानीय निकाय की टीमें सक्रिय रहीं।

गणेशोत्सव के अभी कई दिन बाकी

मुंबई में इस वर्ष गणेशोत्सव 14 सितंबर 2026 से शुरू हुआ है और इसका मुख्य समापन अनंत चतुर्दशी, 25 सितंबर 2026 को होगा।

हालांकि, सभी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन एक ही दिन नहीं होता। कई परिवार और सार्वजनिक मंडल अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग दिनों में बप्पा को विदाई देते हैं। इसी वजह से उत्सव के बीच लगातार कई दिनों तक मुंबई में विसर्जन का सिलसिला चलता रहता है।

पांचवें दिन 32 हजार से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन इसी परंपरा का हिस्सा है।

पहले डेढ़ दिन में भी हुआ था बड़े पैमाने पर विसर्जन

गणेशोत्सव के शुरुआती डेढ़ दिन में भी मुंबई में बड़ी संख्या में गणेश और हरतालिका प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 15 और 16 सितंबर को डेढ़ दिन के विसर्जन के दौरान मुंबई में कुल 61,640 गणेश और हरतालिका प्रतिमाएं जलस्रोतों में विसर्जित की गई थीं।

इसके बाद पांचवें दिन भी हजारों परिवारों और सार्वजनिक मंडलों ने बप्पा को विदाई दी।

आस्था और उत्साह का संगम बना मुंबई

गणेशोत्सव के दौरान मुंबई का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा है। पांचवें दिन भी जगह-जगह गणपति बप्पा के जयकारे सुनाई दिए और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ विसर्जन में शामिल हुए।

कई भक्तों के लिए बप्पा की विदाई भावुक पल भी होती है। पूजा-अर्चना और उत्सव के बाद जब गणपति प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है, तब श्रद्धालु अगले वर्ष फिर से बप्पा के आने की कामना करते हैं।

इस दौरान मुंबई की सड़कों पर धार्मिक उत्साह के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी का भी नजारा देखने को मिला।

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