चेन्नई, तमिलनाडु | 11 सितंबर 2026। दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल ईस्ट जोन के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में ईस्ट जोन ने साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी अपने नाम की। मुकाबला खत्म होने के बाद ईस्ट जोन के खिलाड़ियों ने अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को उनके 100वें फर्स्ट-क्लास मैच के मौके पर खास अंदाज में सम्मानित किया।
इस सम्मान में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी शामिल रहे। वैभव ने शमी को टीम के खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली जर्सी भेंट की। इस खास पल ने शमी के लिए दलीप ट्रॉफी फाइनल की यादों को और खास बना दिया।
100वें फर्स्ट-क्लास मैच पर मिला यादगार सम्मान
दलीप ट्रॉफी का यह फाइनल मोहम्मद शमी के प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर का 100वां मैच था। इस खास उपलब्धि के मौके पर उन्हें टीम की ओर से सम्मान दिया गया।
शमी ने अपने क्रिकेट सफर के दौरान घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक लंबा सफर तय किया है। 100 फर्स्ट-क्लास मैच पूरे करना उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया।
सम्मान समारोह के दौरान शमी ने अपने क्रिकेट सफर में साथ देने वाले साथियों, सपोर्ट स्टाफ, दोस्तों और परिवार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका क्रिकेट करियर इतना लंबा सफर तय करेगा।
वैभव की तरफ से खास तोहफा
शमी के लिए सबसे खास पलों में से एक वह रहा जब उन्हें ईस्ट जोन की ओर से हस्ताक्षर वाली जर्सी भेंट की गई।
युवा वैभव सूर्यवंशी समेत टीम के खिलाड़ियों ने इस जर्सी को खास बनाया। महज 15 साल की उम्र में वैभव का शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ी के साथ एक ही टीम में खेलना और फिर उनके 100वें फर्स्ट-क्लास मैच पर सम्मान करना क्रिकेट के दो अलग-अलग दौरों के खूबसूरत मिलन जैसा रहा।
वैभव इस पूरे टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन के साथ-साथ अपनी क्रिकेटिंग समझ के लिए भी चर्चा में रहे।
शमी ने वैभव की जमकर तारीफ की
सम्मान समारोह के दौरान शमी ने युवा वैभव सूर्यवंशी का जिक्र करते हुए उनकी उम्र और अपने करियर के बीच का अंतर बताया।
शमी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका करियर करीब 15-16 साल का हो चुका है और उसी टीम में 15 साल का एक बच्चा उनके साथ खेल रहा है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों की क्षमता और परिपक्वता की भी सराहना की।
वैभव को टीम के भीतर प्यार से ‘बेबी बॉस’ कहे जाने का जिक्र भी सामने आया है। उनकी कम उम्र के बावजूद मैदान पर फैसले लेने की क्षमता ने उन्हें टीम में अलग पहचान दिलाई है।
दलीप ट्रॉफी फाइनल में वैभव की क्रिकेटिंग समझ भी दिखी
दलीप ट्रॉफी फाइनल के दौरान वैभव सिर्फ बल्लेबाजी के लिए ही चर्चा में नहीं रहे। उन्होंने मैदान पर अपनी क्रिकेटिंग समझ और परिस्थितियों को पढ़ने की क्षमता भी दिखाई।
ईस्ट जोन के उपकप्तान के रूप में उन्होंने अहम मौकों पर फैसले लिए। मुकाबले के दौरान डीआरएस के इस्तेमाल और गेंदबाजी में बदलाव से जुड़े उनके फैसलों ने भी ध्यान खींचा। एक मौके पर उन्होंने मोहम्मद शमी को दोबारा गेंदबाजी पर लाने का सुझाव दिया, जिसके बाद साउथ जोन को महत्वपूर्ण झटका मिला।
यह प्रदर्शन बताता है कि वैभव को सिर्फ भविष्य के बल्लेबाज के तौर पर नहीं, बल्कि खेल की परिस्थितियों को समझने वाले युवा क्रिकेटर के रूप में भी देखा जा रहा है।
शमी ने युवाओं को दी मेहनत की सलाह
अपने 100वें फर्स्ट-क्लास मैच के मौके पर शमी ने युवा खिलाड़ियों को मेहनत जारी रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी को यह नहीं पता होता कि उसकी मेहनत उसे भविष्य में किस मुकाम तक ले जाएगी। इसलिए लगातार मेहनत करना, खेल के प्रति समर्पित रहना और जिस टीम के लिए खेल रहे हैं उसके लिए पूरी क्षमता से प्रदर्शन करना जरूरी है।
शमी का यह संदेश दलीप ट्रॉफी के फाइनल के बाद युवा खिलाड़ियों के लिए खास रहा।
ईस्ट जोन ने 13 साल बाद जीता खिताब
चेन्नई में खेले गए फाइनल में ईस्ट जोन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल की। इसी बढ़त के आधार पर टीम ने दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।
ईस्ट जोन के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम ने 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी ट्रॉफी पर कब्जा किया। कप्तान ईशान किशन की शानदार बल्लेबाजी और टीम के सामूहिक प्रदर्शन ने खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई।
शमी के लिए दोहरी खुशी
एक तरफ ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता, तो दूसरी तरफ मोहम्मद शमी ने अपना 100वां फर्स्ट-क्लास मैच पूरा किया। इस वजह से फाइनल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद खास रहा।
मैच के बाद टीम के खिलाड़ियों से मिला सम्मान और वैभव सूर्यवंशी की ओर से मिली हस्ताक्षर वाली जर्सी इस मौके को और यादगार बना गई।
वैभव और शमी की जोड़ी ने खींचा ध्यान
एक ओर भारतीय क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी अपने करियर के 100वें फर्स्ट-क्लास मैच तक पहुंच चुके हैं, वहीं दूसरी ओर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी अपने करियर के शुरुआती दौर में ही बड़े मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
एक ही टीम में इन दोनों का साथ खेलना क्रिकेट की दो पीढ़ियों के बीच एक खास तस्वीर पेश करता है। शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी और वैभव जैसे युवा खिलाड़ी का उत्साह ईस्ट जोन के ड्रेसिंग रूम के लिए भी खास संयोजन रहा।
दलीप ट्रॉफी फाइनल की जीत के बाद दोनों के बीच सम्मान और अपनापन दिखाने वाला यह पल सोशल मीडिया और क्रिकेट प्रशंसकों के बीच भी चर्चा का विषय बना।
दलीप ट्रॉफी की जीत, शमी का 100वां फर्स्ट-क्लास मैच और वैभव की ओर से मिला खास तोहफा—इन तीनों ने चेन्नई में ईस्ट जोन की खिताबी शाम को यादगार बना दिया।
