फर्जी ई-मेल ने उड़ाए 1 करोड़, 3 घंटे में 200 खातों में पहुंची रकम; भोपाल पुलिस ने बचाए 95 लाख

भोपाल, 31 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर के प्रसिद्ध हेरिटेज होटल नूर-उस-सबाह पैलेस से जुड़े रिलायबल ग्रुप को साइबर अपराधियों ने फर्जी ई-मेल के जरिए करीब 1 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। ठगों ने संबंधित कारोबारी कंपनी की ई-मेल आईडी से मिलती-जुलती फर्जी आईडी तैयार की और भुगतान के लिए बैंक खाते की बदली हुई जानकारी भेज दी। ग्रुप ने उसी खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।

मामले का खुलासा होने के बाद साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की गई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की और करीब 95 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड करा दिए। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि ठगों ने रकम को बेहद तेजी से देश के अलग-अलग हिस्सों के लगभग 200 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया था।


📧 एक ई-मेल से शुरू हुआ पूरा खेल

जानकारी के मुताबिक रिलायबल ग्रुप को एक कंपनी को करीब 1 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। भुगतान की प्रक्रिया के दौरान साइबर अपराधियों ने संबंधित कंपनी के नाम और ई-मेल पते से मिलती-जुलती एक फर्जी ई-मेल आईडी तैयार की।

इसके बाद ग्रुप को बैंक खाते की जानकारी भेजी गई और बताया गया कि भुगतान इसी नए खाते में किया जाना है।

ग्रुप के कर्मचारियों ने ई-मेल में दी गई जानकारी पर भरोसा करते हुए करीब एक करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।

ठगी की सबसे बड़ी वजह यही बताई जा रही है कि फर्जी ई-मेल वास्तविक कंपनी की ई-मेल आईडी से काफी मिलती-जुलती थी।


⏱️ करीब दो घंटे बाद खुला ठगी का राज

रकम ट्रांसफर करने के करीब दो घंटे बाद संबंधित कंपनी से संपर्क हुआ।

कंपनी ने बताया कि उसे एक करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।

इसके बाद रिलायबल ग्रुप के अधिकारियों को संदेह हुआ कि कहीं बैंक खाते की जानकारी बदलकर तो नहीं भेजी गई थी।

जांच करने पर पता चला कि जिस खाते में पैसा भेजा गया था, वह वास्तविक कंपनी का खाता नहीं था।

यहीं से पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।


🚨 1930 पर शिकायत ने बचाए 95 लाख

ठगी का पता चलते ही मामले की जानकारी साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दी गई।

इसके बाद स्टेट साइबर पुलिस ने NCRP यानी National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से कार्रवाई शुरू की।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शिकायत रकम ट्रांसफर होने के कुछ ही समय बाद कर दी गई थी।

पुलिस ने बैंकिंग सिस्टम के जरिए रकम को ट्रैक किया और अलग-अलग खातों में मौजूद करीब 95 लाख रुपये होल्ड कराने में सफलता हासिल की।


💰 1 करोड़ रुपये को 200 खातों में बांट दिया

पुलिस की प्रारंभिक जांच में साइबर अपराधियों के काम करने का तरीका भी सामने आया है।

ठगों ने एक करोड़ रुपये अपने किसी एक खाते में रखने के बजाय रकम को तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में भेजना शुरू कर दिया।

करीब तीन घंटे के भीतर रकम लगभग 200 बैंक खातों में पहुंचा दी गई।

यानी साइबर अपराधियों ने पैसे को इतनी तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया कि रकम को ट्रेस करना और वापस रोकना चुनौतीपूर्ण हो गया।


💸 करीब 5 लाख रुपये निकालने में सफल रहे ठग

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद साइबर अपराधी पूरी तरह रकम निकालने में सफल नहीं हो सके।

रिपोर्टों के मुताबिक ठग करीब 5 लाख रुपये निकालने में सफल रहे, जबकि करीब 95 लाख रुपये पुलिस ने होल्ड करा दिए।

यह कार्रवाई साइबर ठगी के मामलों में तथाकथित गोल्डन ऑवर की अहमियत को भी दिखाती है—यानी ठगी के तुरंत बाद शिकायत करना रकम को बचाने में निर्णायक हो सकता है।


🏨 नूर-उस-सबाह पैलेस से जुड़ा है ग्रुप

यह मामला भोपाल के प्रसिद्ध हेरिटेज होटल नूर-उस-सबाह पैलेस से जुड़े रिलायबल ग्रुप का है।

नूर-उस-सबाह भोपाल के प्रमुख ऐतिहासिक-हेरिटेज होटल परिसरों में जाना जाता है। शहर में इसके साथ जुड़े कारोबारी समूह की गतिविधियों के बीच यह साइबर फ्रॉड सामने आया है।

यह मामला खास इसलिए भी है क्योंकि ठगी किसी सामान्य OTP या लिंक के जरिए नहीं बल्कि Business Email Compromise जैसी तकनीक से किए जाने की आशंका है।


🕵️ पुलिस अब ठगों तक पहुंचने में जुटी

95 लाख रुपये होल्ड कराने के बाद पुलिस की जांच का अगला लक्ष्य साइबर अपराधियों तक पहुंचना है।

जांच एजेंसियां उन करीब 200 बैंक खातों की जानकारी जुटा रही हैं, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

  • बैंक खाते किन लोगों के नाम पर हैं?
  • इन खातों का इस्तेमाल किसने किया?
  • रकम आगे किन खातों में भेजी गई?
  • ठगों ने फर्जी ई-मेल कैसे तैयार की?
  • वास्तविक कंपनी की जानकारी अपराधियों तक कैसे पहुंची?
  • क्या इस वारदात में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका थी?

📱 ई-मेल के साथ WhatsApp का भी इस्तेमाल

रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी ई-मेल के साथ WhatsApp के जरिए भी बैंक खाते की जानकारी भेजी गई थी

इससे ठगों ने भुगतान करने वाले कर्मचारियों के बीच यह भरोसा पैदा करने की कोशिश की कि बैंक खाते में बदलाव वास्तविक है।

ऐसे मामलों में साइबर अपराधी अक्सर किसी कारोबारी लेनदेन की पहले से मौजूद जानकारी का फायदा उठाते हैं और भुगतान के अंतिम चरण में बैंक खाता बदलने का फर्जी निर्देश देते हैं।


⚠️ कारोबारियों के लिए बड़ा सबक

यह घटना सिर्फ एक होटल ग्रुप की साइबर सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि उन सभी कंपनियों के लिए चेतावनी है जो ई-मेल के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान करती हैं।

किसी भी कंपनी को बैंक खाता बदलने संबंधी ई-मेल मिलने पर सिर्फ ई-मेल के आधार पर भुगतान नहीं करना चाहिए।

खाते में बदलाव की जानकारी को पुराने और पहले से सत्यापित मोबाइल नंबर या आधिकारिक संपर्क के जरिए दोबारा जांचना जरूरी है।


🛡️ साइबर ठगी में 1930 क्यों महत्वपूर्ण है?

अगर किसी व्यक्ति या कंपनी के बैंक खाते से साइबर ठगी के जरिए पैसा चला जाता है तो 1930 साइबर हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत करना महत्वपूर्ण है।

इस मामले में भी शिकायत जल्दी होने के कारण पुलिस रकम के बड़े हिस्से को होल्ड कराने में सफल रही।

यानी ठगी के बाद घंटों तक इंतजार करने के बजाय तुरंत बैंक, 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल को सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण है।


🔎 अभी जांच जारी

फिलहाल पुलिस की कार्रवाई मुख्य रूप से रकम को ट्रैक करने और बैंक खातों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने पर केंद्रित है।

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 95 लाख रुपये होल्ड कराए जा चुके हैं, जबकि करीब 5 लाख रुपये की रकम निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।

नियमित FIR की स्थिति को लेकर रिपोर्ट में बताया गया है कि उस समय तक मामला जांच के स्तर पर था। इसलिए आरोपियों की पहचान या गिरफ्तारी के बारे में अभी कोई अंतिम दावा करना उचित नहीं होगा।


📊 पूरी खबर एक नजर में

जानकारीविवरण
📰 खबर की तारीख31 अगस्त 2026
📍 स्थानभोपाल, मध्य प्रदेश
🏨 होटलनूर-उस-सबाह पैलेस
🏢 संबंधित समूहरिलायबल ग्रुप
💰 ठगी की रकमलगभग ₹1 करोड़
📨 ठगी का तरीकाफर्जी ई-मेल/बैंक डिटेल
🏦 खातों की संख्यालगभग 200
🔒 होल्ड रकम₹95 लाख
💸 निकाली गई रकमकरीब ₹5 लाख
📞 शिकायतसाइबर हेल्पलाइन 1930
👮 जांचस्टेट साइबर पुलिस
🔎 स्थितिजांच जारी

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