नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच एक वायरल वीडियो ने संगठन के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। वीडियो में पार्टी के तत्कालीन प्रवक्ता विजेता दहिया एक मॉल के बर्गर आउटलेट पर भोजन करते दिखाई दिए, जबकि उसी समय जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारी छात्रों और कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प चल रही थी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं, जिसके बाद CJP ने तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटा दिया और उनसे सभी आधिकारिक जिम्मेदारियां वापस ले लीं।
CJP द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि संगठन किसी भी प्रकार के असंवेदनशील व्यवहार को स्वीकार नहीं कर सकता। पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब हजारों छात्र, अभ्यर्थी और समर्थक आंदोलन में शामिल होकर कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, उस समय किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का इस तरह का आचरण संगठन की भावना और उद्देश्य के विपरीत माना गया। पार्टी ने कहा कि संगठन की विश्वसनीयता बनाए रखने और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ यह दावा किया जाने लगा कि जिस समय संसद मार्च के दौरान पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर रही थी और कई छात्र घायल हो रहे थे, उसी दौरान विजेता दहिया बर्गर आउटलेट पर आराम से भोजन कर रहे थे। हालांकि वीडियो के समय और परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, लेकिन इस घटना ने आंदोलन के समर्थकों में नाराजगी पैदा कर दी। कई लोगों ने इसे आंदोलन के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया और पार्टी नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की।
CJP के संस्थापक एवं वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे समय में संगठन के प्रत्येक पदाधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि वह आंदोलन की भावना के अनुरूप व्यवहार करे। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी यदि कोई पदाधिकारी संगठन की मर्यादा के विरुद्ध कार्य करेगा तो उसके खिलाफ इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर विजेता दहिया ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उनका कहना है कि वायरल वीडियो को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने आंदोलन छोड़कर कोई निजी कार्यक्रम नहीं किया था और कुछ मिनट भोजन करना किसी भी प्रकार से छात्रों या आंदोलन के प्रति असंवेदनशीलता नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और इसके आधार पर उनके खिलाफ माहौल बनाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई और प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखा। संगठन के नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर केंद्रित नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई है।
दिल्ली पुलिस द्वारा संसद मार्च के दौरान की गई कार्रवाई भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास किया, जबकि आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया। इस मुद्दे को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजेता दहिया को हटाने का निर्णय CJP की संगठनात्मक छवि को बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि आंदोलन के दौरान किसी भी नेता या पदाधिकारी के लिए अलग मानदंड नहीं होंगे और अनुशासन सभी पर समान रूप से लागू होगा। वहीं सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे जवाबदेही का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय करार दिया।
