आस्था और पर्यावरण की चिंता: अमरनाथ यात्रा के दूसरे दिन ही हैरान करने वाली तस्वीर; 40 दिनों के भीतर घटकर 4 फीट के रह गए बाबा बर्फानी; 23 मई को आकार था करीब 7 फीट

स्थान: श्रीनगर / जम्मू

दिनांक: 4 जुलाई, 2026

विशेष संवाददाता, श्रीनगर:

पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा के औपचारिक आगाज़ को अभी महज 24 घंटे ही बीते हैं, लेकिन दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित पवित्र गुफा से शिवभक्तों को हैरान और थोड़ा चिंतित करने वाली खबर सामने आ रही है। प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिमलिंग (Ice Shivling)—‘बाबा बर्फानी’ का आकार पिछले 40 दिनों में तेजी से घटकर अब केवल 4 फीट रह गया है

पवित्र गुफा से शनिवार (4 जुलाई) को यात्रा के दूसरे दिन सामने आई ताजा तस्वीरों में हिमलिंग की ऊंचाई और चौड़ाई दोनों में भारी कमी देखी गई है। मौसम वैज्ञानिकों और श्राइन बोर्ड के विशेषज्ञों का मानना है कि गुफा के आसपास बढ़ रहे वैश्विक तापमान और लगातार हो रही प्राकृतिक व मानवीय हलचलों के चलते यह स्थिति बनी है।

40 दिनों का गणित: 7 फीट से 4 फीट पर कैसे सिमटे बाबा बर्फानी?

श्राइन बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड और सुरक्षा बलों द्वारा समय-समय पर ली गई तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन से हिमलिंग के तेजी से पिघलने की पूरी कहानी साफ होती है:

  • 23 मई (पहली दिव्य झलक): अमरनाथ गुफा की सुरक्षा में मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने जब मई के अंतिम सप्ताह में पहली तस्वीर जारी की थी, तब बाबा बर्फानी का आकार अपने पूरे भव्य रूप में लगभग 7 फीट ऊंचा था।
  • 29 जून (प्रथम पूजा): जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई आधिकारिक ‘प्रथम पूजा’ के समय तक हिमलिंग की ऊंचाई घटकर 5 फीट से थोड़ी ज्यादा बची थी।
  • 3 जुलाई (यात्रा का पहला दिन): यात्रा शुरू होने के दिन तक हिमलिंग लगभग 4.5 फीट का रह गया था।
  • 4 जुलाई (आज – यात्रा का दूसरा दिन): शनिवार सुबह जब पहले जत्थे के श्रद्धालुओं ने मुख्य गुफा में प्रवेश किया, तब बाबा बर्फानी का आकार ठीक 4 फीट के आसपास दर्ज किया गया है।

तेजी से पिघलने की मुख्य वजह: बढ़ता तापमान और मानवीय गतिविधियां

अमरनाथ गुफा में बनने वाले इस शिवलिंग को विज्ञान की भाषा में ‘आइस स्टैलेग्माइट’ (Ice Stalagmite) कहा जाता है, जो गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदों के जमने से प्राकृतिक रूप से निर्मित होता है।

विशेषज्ञों की चिंता:

भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल जून के महीने में कश्मीर के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया है। इसके अलावा, यात्रा शुरू होने से ठीक पहले और शुरुआती दो दिनों में गुफा के भीतर हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने, सांसों के छोड़े जाने और लगातार हो रही मानवीय गतिविधियों से गुफा के अंदर का ‘माइक्रो-क्लाइमेट’ (आंतरिक पर्यावरण) गर्म हो रहा है। छत से टपकने वाला पानी अब जमने के बजाय नीचे जमे हिमलिंग को ही तेजी से पिघला रहा है।

यात्रा के दूसरे दिन 12 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

भले ही बाबा बर्फानी का आकार घट रहा हो, लेकिन देश भर से आने वाले शिवभक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। यात्रा के पहले दिन रिकॉर्ड 12,000 से अधिक पंजीकृत श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए।

यात्रा मार्ग और रूट गाइडदूरी और चढ़ाई का मिजाजवर्तमान सुरक्षा व प्रशासनिक स्टेटस
पारंपरिक पहलगाम रूट48 किलोमीटर (लंबा लेकिन सरल रास्ता)जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से आज तीसरा जत्था इसी मार्ग के लिए रवाना हुआ।
शॉर्ट बालटाल रूट14 किलोमीटर (छोटा लेकिन बेहद कठिन चढ़ाई)सुबह हल्की बारिश के बावजूद आरएफआईडी (RFID) चेकिंग के बाद यात्रियों को डोमेल से आगे बढ़ने दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रियों को दिलाए ‘5 विशेष संकल्प’

अमरनाथ यात्रा के इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश के सभी श्रद्धालुओं को बधाई दी है। पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी ने इस बार अमरनाथ यात्रियों से 5 विशेष संकल्प लेने की अपील की है:

  1. यात्रा मार्ग पर प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छता को बनाए रखेंगे।
  2. सभी सुरक्षा निर्देशों और ट्रैफिक एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करेंगे।
  3. ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों को खरीदेंगे।
  4. यात्रा से सुरक्षित लौटने के बाद अपने घर या पास में एक पौधा अवश्य लगाएंगे।
  5. यात्रा के दौरान देश की एकता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश फैलाएंगे।

जम्मू प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जिन यात्रियों के पास जिस तारीख का वैलिड रजिस्ट्रेशन कार्ड है, उन्हें उसी दिन घाटी में प्रवेश (Entry) दिया जाएगा। बिना पूर्व-पंजीकरण के आने वाले किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *