स्नैपचैट के ‘डेंजरस फीचर्स’ पर अमेरिका में मुकदमा: ऐप की फ्रेंड रिकमेंडेशन और लोकेशन ट्रैकिंग से 12 साल की बच्ची तक पहुंचा था रेपिस्ट; भारत में 25 करोड़ यूजर्स के लिए बढ़ा सुरक्षा का खतरा

दिनांक: 26 जून, 2026

अंतरराष्ट्रीय डेस्क, वॉशिंगटन/नई दिल्ली:

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट (Snapchat) की पैरेंट कंपनी ‘स्नैप इंक’ (Snap Inc.) अमेरिका में एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज कानूनी संकट में घिर गई है. अमेरिका के मिसौरी राज्य की एक अदालत में एक पीड़ित परिवार ने स्नैपचैट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐप के खतरनाक एल्गोरिदम और इन-बिल्ट फीचर्स (आंतरिक सुरक्षा कमियों) के कारण एक 25 साल का शातिर रेपिस्ट उनकी 12 साल की नाबालिग बेटी तक पहुँचने में कामयाब रहा, जिसके बाद उसने बच्ची का यौन उत्पीड़न किया.

यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि भारत इस समय स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बेस बन चुका है, जहां इसके 25 करोड़ (250 मिलियन) से अधिक एक्टिव मंथली यूजर्स हैं. ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और ऐप के प्राइवेसी फीचर्स को लेकर भारत में भी चिंताएं गहरी हो गई हैं.

स्नैपचैट के इन दो फीचर्स ने रेपिस्ट का काम किया आसान

अदालत में दायर मुकदमे के अनुसार, पीड़ित बच्ची ने साल 2021 में महज 11 साल की उम्र में अपने माता-पिता की जानकारी के बिना स्नैपचैट पर अकाउंट बनाया था. स्नैपचैट के निम्नलिखित फीचर्स ने अपराधी को बच्ची तक पहुंचाया:

  1. क्विक ऐड/फ्रेंड रिकमेंडेशन (Quick Add): बच्ची के अकाउंट बनाने के एक साल बाद, स्नैपचैट के फ्रेंड सजेशन एल्गोरिदम ने आसपास के हाईस्कूलों की नाबालिग लड़कियों के साथ-साथ इस बच्ची का अकाउंट भी आरोपी गेब्रियल जोएल वैलेन्टिन-रियोस (25 वर्ष) को ‘फ्रेंड’ के रूप में रिकमेंड (सुझाव) कर दिया, जबकि आरोपी का उन बच्चियों से वास्तविक जीवन में कोई संबंध नहीं था.
  2. स्नैप मैप्स (Snap Maps – लाइव लोकेशन): स्नैपचैट के इस फीचर की वजह से आरोपी को बच्ची की जानकारी के बिना उसके घर का सटीक पता और रियल-टाइम लोकेशन मिल गई.

18 साल की जेल काट रहा है आरोपी: आरोपी ने खुद को 17 साल का हाईस्कूल का छात्र बताकर बच्ची को जाल में फंसाया (Grooming की) और बाद में उसे बहला-फुसलाकर मिलने बुलाया, जहां उसने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया. आरोपी वैलेन्टिन-रियोस वर्तमान में मिसौरी की जेल में 18 साल की सजा काट रहा है, लेकिन अब पीड़ित परिवार ने स्नैपचैट को इस अपराध को बढ़ावा देने का जिम्मेदार ठहराते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

भारत के लिए क्यों बड़ा है खतरा? 90% यूजर्स युवा और किशोर

स्नैपचैट की अपनी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इसके यूजर्स की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है:

भारतीय स्नैपचैट मार्केट के मुख्य आंकड़ेविवरण
कुल मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU)25 करोड़ से अधिक (विश्व में सबसे तेजी से बढ़ता बाजार)
यूजर्स का आयु वर्ग90% से अधिक दैनिक यूजर्स 13 से 34 वर्ष के बीच हैं
एआर लेंस (AR Lenses) का क्रेजभारतीय यूजर्स हर महीने 80 अरब (80 Billion) से ज्यादा बार लेंस का इस्तेमाल करते हैं

भारत में चिंता की वजह: भारत में स्नैपचैट का मुख्य यूजर बेस ‘जेन-जी’ (Gen Z) और स्कूली बच्चे हैं, जो अक्सर ऐप के सुरक्षा फीचर्स और प्राइवेसी सेटिंग्स से अनजान होते हैं. ‘स्नैप मैप्स’ जैसे फीचर्स भारत में भी ऑन रहते हैं, जिससे बच्चों की लाइव लोकेशन अजनबियों को आसानी से दिख सकती है.

पहले भी लग चुके हैं आरोप: ‘सेक्सटोर्शन’ का गढ़ बन रहा प्लेटफॉर्म

स्नैपचैट के खिलाफ यह पहला मुकदमा नहीं है. इससे पहले साल 2024 में अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य के अटॉर्नी जनरल ने भी कंपनी पर गंभीर मुकदमा ठोका था.

  • क्या है सेक्सटोर्शन (Sextortion)?: अपराधियों द्वारा फेक आईडी बनाकर नाबालिगों को फंसाना, उनसे आपत्तिजनक तस्वीरें (Explicit Content) मंगवाना और फिर उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे वसूलना.
  • मुकदमे का मुख्य तर्क: वादी पक्ष के वकीलों का कहना है कि स्नैपचैट के अधिकारी लंबे समय से जानते हैं कि उनके ऐप का डिजाइन (जैसे मैसेज का तुरंत गायब हो जाना) शिकारियों और अपराधियों के लिए एक ‘परफेक्ट एनवायरनमेंट’ तैयार करता है, लेकिन कंपनी ने माता-पिता को जागरूक करने या इन फीचर्स को ब्लॉक करने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए.

विशेषज्ञों की सलाह: साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों के मोबाइल में स्नैपचैट की सेटिंग्स की जांच करें और ‘गोस्ट मोड’ (Ghost Mode) को तुरंत ऑन करें, ताकि ‘स्नैप मैप’ पर उनकी लोकेशन पूरी तरह से छिपी रहे और वे किसी अनजान ऑनलाइन शिकारी का शिकार होने से बच सकें.

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