चुनावी मंच पर फिसली भाजपा विधायक की जुबान, मुख्यमंत्री मोहन यादव को कह दिया ‘प्रधानमंत्री’; सियासी गलियारों में ‘सोशल वर्क’ की अनोखी परीक्षा और मंत्री जी के ‘निजी दरबार’ की चर्चा गर्म

स्थान: भोपाल (मध्य प्रदेश)

दिनांक: 24 जून, 2026

विशेष संवाददाता, भोपाल:

मध्य प्रदेश के सियासी हलकों में इन दिनों नेताओं के बयान, अनोखी प्रशासनिक परीक्षाएं और मंत्रियों के कामकाज के तरीके जमकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। बीते 24 घंटों में प्रदेश की राजनीति से तीन ऐसे दिलचस्प और चर्चा का विषय बने मामले सामने आए हैं, जिन्होंने राजनेताओं से लेकर आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसमें एक भाजपा विधायक की जुबान फिसलने का मामला, ‘सोशल वर्क’ के छात्रों की व्यावहारिक परीक्षा और एक कैबिनेट मंत्री द्वारा अपने सरकारी दफ्तर के बजाय निजी आवास पर ‘दरबार’ लगाने का मामला शामिल है।

1. “हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री डॉ. मोहन यादव…” — जब मंच पर फिसली भाजपा विधायक की जुबान

पहला मामला एक सार्वजनिक कार्यक्रम का है, जहां मंच से भाषण देते हुए सत्ताधारी दल भाजपा के एक स्थानीय विधायक की जुबान अचानक इस कदर फिसल गई कि उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सीधे देश का ‘प्रधानमंत्री’ संबोधित कर दिया।

  • क्या था पूरा वाकया?: विधायक जी अपने क्षेत्र में चल रहे केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का बखान कर रहे थे। इसी उत्साह में उन्होंने जोश-जोश में माइक पर कह दिया, “हमारे देश और प्रदेश के यशस्वी प्रधानमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में विकास की नई गंगा बह रही है।”
  • मंच पर सन्नाटा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: विधायक के मुंह से मुख्यमंत्री के लिए ‘प्रधानमंत्री’ शब्द सुनते ही मंच पर बैठे अन्य भाजपा नेता और प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। हालांकि, विधायक जी को तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने ‘मुख्यमंत्री’ कहकर अपनी बात को सुधारा। लेकिन तब तक कार्यक्रम में मौजूद किसी शख्स ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से मीम्स और चुटकुलों के साथ वायरल हो रहा है।

2. नेताओं के लिए ‘सोशल वर्क’ की परीक्षा: किताबी ज्ञान बनाम व्यावहारिक धरातल

दूसरी दिलचस्प चर्चा मध्य प्रदेश के शिक्षा और राजनीतिक परिदृश्य से आ रही है, जहां सामाजिक कार्य (Master of Social Work – MSW) की पढ़ाई कर रहे छात्रों और राजनीति से जुड़े युवाओं के लिए आयोजित एक विशेष सत्र को ‘सोशल वर्क की परीक्षा’ के रूप में देखा जा रहा है।

हाल ही में हुए एक कार्यक्रम के संदर्भ में शिक्षाविदों का कहना है कि आज के दौर में जो युवा राजनीति या समाज सेवा को अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए असली परीक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं है। इसके तहत ग्राउंड स्तर पर जाकर सरकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाना और समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं का समाधान करना ही उनकी ‘व्यावहारिक परीक्षा’ है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी हाल ही में छात्रों से संवाद के दौरान व्यावहारिक ज्ञान और समाज सेवा के प्रति समर्पण को सबसे बड़ी कसौटी बता चुके हैं।

3. सरकारी दफ्तर छोड़ निजी घर पर ‘मंत्री जी का दरबार’; विपक्ष ने उठाए सवाल

इन सबके बीच प्रशासनिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश सरकार के एक कद्दावर मंत्री को लेकर हो रही है। शिकायतें और खबरें आम हैं कि माननीय मंत्री जी मंत्रालय (वल्लभ भवन) या अपने निर्धारित शासकीय कार्यालय में बैठने के बजाय अपने ‘निजी घर’ (प्राइवेट आवास) पर ही अपना पूरा लाव-लश्कर लेकर बैठ रहे हैं।

निजी घर बना शक्ति का केंद्र:

सुबह से लेकर देर रात तक मंत्री जी के निजी बंगले के बाहर वीआईपी गाड़ियों, प्रशासनिक अधिकारियों, ट्रांसफर-पोस्टिंग के आवेदकों और क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का तांता लगा रहता है। सारे जरूरी कागजातों पर हस्ताक्षर, विभागीय समीक्षा बैठकें और आम जनता की सुनवाई (दरबार) इसी निजी आवास से संचालित की जा रही है।

विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर पारदर्शिता के अभाव और नौकरशाही के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। विपक्षी प्रवक्ताओं का कहना है कि जब सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च करके मंत्रियों के लिए शासकीय दफ्तर और आधुनिक सुविधाएं बनाई हैं, तो फाइलों को निजी घरों पर ले जाकर ‘समानांतर दरबार’ क्यों चलाया जा रहा है? वहीं, मंत्री समर्थकों का तर्क है कि जनता के लिए मंत्री जी 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं और घर से काम करने का मकसद सिर्फ इतना है कि किसी भी फरियादी को समय के बंधन के कारण खाली हाथ न लौटना पड़े।

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