भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर का निरीक्षण करेगा एमपी हाईकोर्ट, 2 अप्रैल से पहले दौरे की तैयारी

17 मार्च 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहे विवाद के बीच अहम फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा है कि वह 2 अप्रैल से पहले इस परिसर का स्वयं निरीक्षण करेगा, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

हाईकोर्ट का निरीक्षण करने का फैसला

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में कई तरह के विवाद हैं, इसलिए कोर्ट खुद स्थल का निरीक्षण करना चाहता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान मामले से जुड़े किसी भी पक्ष को वहां उपस्थित रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही अगली नियमित सुनवाई की तारीख 2 अप्रैल तय की गई है।

विवाद क्या है

धार स्थित यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है।

हिंदू पक्ष इस स्थल को माता सरस्वती का मंदिर (भोजशाला) मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है।

ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश के अनुसार, यहां मंगलवार को हिंदू पूजा कर सकते हैं, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता है।

ASI रिपोर्ट में क्या सामने आया

हाईकोर्ट के निर्देश पर ASI ने इस परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था और 2000 से अधिक पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

रिपोर्ट के अनुसार, यहां पहले परमार काल में एक बड़ा संरचना मौजूद थी, जो संभवतः शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी थी।

सर्वे में मिले शिलालेख, मूर्तियां, स्तंभ और स्थापत्य अवशेष इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मौजूदा ढांचे का निर्माण प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का उपयोग करके किया गया हो सकता है।

हिंदू और मुस्लिम पक्ष के दावे

हिंदू पक्ष का कहना है कि ASI द्वारा मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख यह साबित करते हैं कि यह स्थल मूल रूप से एक प्राचीन मंदिर था।

वहीं मुस्लिम पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए ASI सर्वे पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सर्वे के दौरान उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और परिसर में रखी गई वस्तुओं को भी रिपोर्ट में शामिल किया गया।

कोर्ट ने सभी पक्षों को दिया अवसर

हाईकोर्ट ने कहा है कि मामले में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। कोर्ट ने अंतरिम आवेदनों को स्वीकार करते हुए कहा कि पक्षकार अपने दस्तावेज और हलफनामे पेश कर सकते हैं।

निष्कर्ष: भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में हाईकोर्ट का स्थल निरीक्षण एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई में अहम निर्णय लिया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *