शिवसागर (असम) |
पिछले कुछ समय से पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में पहचान, नागरिकता और सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर बहस तेज़ हो गई है। इसी बीच असम के एक शहर में हुए विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर इन पुराने मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
असम के Sivasagar शहर में स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों ने ऐतिहासिक तालातल घर स्मारक के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असम समझौते (Assam Accord) को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए और राज्य में इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था लागू करने पर भी विचार होना चाहिए।
लंबे समय से चल रहा है पहचान का सवाल
असम में लंबे समय से यह मुद्दा उठता रहा है कि राज्य की स्थानीय संस्कृति, भाषा और जनसंख्या संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए सख्त नीतियाँ बननी चाहिए। कई संगठनों का मानना है कि अवैध प्रवास और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।
युवाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन में कई युवा संगठन और महिला समूह भी शामिल हुए। उन्होंने सरकार से मांग की कि असम समझौते के प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए और राज्य की पहचान से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की नजर
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, लेकिन यह दिखाता है कि पूर्वोत्तर भारत में पहचान और नागरिकता से जुड़े मुद्दे अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।

